जरा याद करो उनकी क़ुरबानी |

जरा याद करो उनकी क़ुरबानी |

जरा याद करो उनकी क़ुरबानी |

 

बदली हमारी तक़दीर बदले हमारे किनारे

बदली हमारी संस्कृति बदले हमारे नज़ारे

नही जो बदला है कारगिल क घाव हमारे

हुआ था जो उपाहस ताज पे  हमारे ||

हर पल हर दिन शहीद होता एक एक वीर जवान

मैं पूछता हु शांतिवार्ताओ से यह केसा भारत निर्माण

क्यों सान्तवना प्रकट कर  हर नेता बनना चाहता महान

अपनी भारत माँ के लिए माँ को छोड़ दे वो हैं हमारा जवान ||

अपनी माँ के लिए ना एक इंच भी पीछे हटें हैं

वो हमारा सैनिक इंचो में कटे हैं |

इसीलिए हर जो पर्व मनाते हैं |

वें भारत माँ के लाल अम्बर में में नज़र आशीष देते आते हैं||

अपनी माँ के लिए वह सैनिक घायल हुआ था

उस क्षण तो स्वय शत्रू भी उसका कायल हुआ था |

अपने पिता के कंधो पे खेलने का क् ऋण चुकाने में असक्षम था|

क्योंकि अंत में भी कंधो जो उनके चड़ा था ||

 

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Lakshya Ojha
lakshyaoj@gmail.com


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